Showing posts with label ख्वाहिश. Show all posts
Showing posts with label ख्वाहिश. Show all posts
Wednesday, February 14, 2024
ख्वाहिशों की अंतिम तिथि
एक लंबे टाइम के संघर्ष से गुजर जाने के बाद अपनी इच्छाओं को मार के जीने के बाद। एक अवस्था ऐसी आ जाती। की खुशी मिल जाने का भी कोई अर्थ नही रह जाता हैं। फिर खुश होना एक ढोंग लगने लगता है। वो लड़के कभी खुश ही न हो सकें खुशी मिलने के बाद भी जिनकी जीवन शुरुआती दौर ही संघर्षों से भरा था। ये अपने इच्छाओं खून कर दिए उस दौर में ही। जो अब ताउम्र जीवित नहीं हो सकती। इनकी जीवन निस्पृह हैं। ये लड़के वंचित रह गए बहुत सारी चीजों से जो खुश होने का जरिया था। एक उम्र में । उस उम्र में उन चीजों का बस दर्शक बने रहे तसल्ली से, बस इनका जुर्म ये था कि, ऐसे स्मान्य परिवार से ताल्लुक था इनका कि। जब चलना सीख रहे थे ये लड़के बचपन में तो इनको छोड़ दिया गया जा चल ले बिन किसी सहारे के फिर ये खडे हो के चलने के सहारे के लिए लकड़ी खुद रेंग कर उठाई थी " ये लड़के अच्छे महंगे विलासिता जीवन के जीने के बारे मात्र में सोच भर ले तो लगता है की पाप तो नही कर रहे। इच्छाओं को मर जाना ही जीवन में मोहभांग हैं" इन लड़को को इच्छाओं से क्या ताल्लुक रहा होगा अब तक। ये बता पाना मुश्किल है।
Subscribe to:
Posts (Atom)
-
बचा रखा है सभ्यताएं और संस्कार आज भी उन लड़कियों और महिलाओं ने जो आज के दौर में भी दिख जाती है। 36 इंच की साइकिल के करियर पे बैठ के जाती हुई...
-
हम मानते हैं इक पिढी बाद बहुत कुछ बदल जाता है हम जब बड़े हो जाते हैं तो हम अपने मर्जी से जिना चाहते हैं नहीं चाहते कोई रोक टोक करें यहां तक ...
-
एक लंबे टाइम के संघर्ष से गुजर जाने के बाद अपनी इच्छाओं को मार के जीने के बाद। एक अवस्था ऐसी आ जाती। की खुशी मिल जाने का भी कोई अर्थ नही रह ...
-
जीवन के हर त्रासदी के बाद आदमी के हिस्से में इतना जरूर आना चाहिए, राशन, मिटी, पानी और प्यार जिसके सहारे वो जी सके बाकी बची उम्र।
-
बोलोगे तो मारे जाओगे हा में हा नही मिलेगी तो मारे जाओगे उनके रंग में ही रंगना होगा। दूसरा रंग अपनाओगे तो मारे जाओगे हक मांगोगे तो कटघरे में...
-
भूत की स्मृतियाँ वर्तमान का संघर्ष और बच्चों में भविष्य । पिता की उँगली पकड़ कर चलना सीखते बच्चे एक दिन इतने बड़े हो जाते हैं कि भूल जाते है...
-
मुझको सताने को कोई वजह ढूंढ लो, नहीं है तो बेवजह की कोई वजह ढूंढ लो, रूठना मनाना यहीं तो है रिश्ता निभाना, पास रहने का कोई तो वज...
-
अक्सर जीवन कभी इतनी तेज़ गति से गुज़रता है तब वह कुछ अहसास करने का और समझने का समय नहीं देता पर जब कभी-कभी जीवन इस कदर ठहर जाता है त...