चीखे मेरी कलमो की
मेरी सोच मेरी कलम से, कहानी, पोएम, नोवेल, एहसास और कलम, हिंदी साहित्य
Sunday, May 31, 2026
मुजरा करती महिलाएं
अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्ता को बचाए रखा है। वर्ना जिनको शराबियों, आवरों ने दरकिनार किया वे लौंडे जैसी धंधेबाज लड़कियां बंध गयी अच्छे पढ़े लिखे सुशील लड़को के साथ और झूठे मुकदमे कर के एक पैर पे मुजरा करने लगी चंद पैसों के लिए कोर्ट कचहरियों गांव मोहल्लों में।
Monday, April 27, 2026
Saturday, April 25, 2026
खानदानी पेशा धंधे का
गलती हुई हो तब न माफ किया जाए। सुन है मर्दों को झूठे केस में फसाना उसका खानदानी पेशा है।
Sunday, April 19, 2026
बदलते व्यवस्य
जब धंधेबाज महिलाओं ने कोर्ट में धन्धें के लिये लाइन लगाई, तब जो असली प्रताड़ित महिलाएं थीं वो अपनी असली हक पाने से पीछे छुट गई, महिलाएं ही खा गई महिलाओं का हक। महिला सशक्तिकर कुछ महिलाओं का धंधा बन गया।
Friday, April 17, 2026
कोर्ट कचहरी को धंधा बनाती महिलाएं।
सुंदर, सुशील, MBA, MCA की हुई महिलाएं, जब शाम को शराबी पति से गाली और मारपीट खाने के बाद, सुबह में फिर नाश्ते तैयार कर उसी शराबी पति को ऑफिस भेजती, देख के कई सारे ख्यालों के साथ बस यही सोचता हूं। आज के दौर में, ये महिलाएं कितने कस के पकड़ी हैं। रिश्ते की डोर को, जो इस हालत में भी फेविकिट के तरह जुड़ा हुआ है। रिश्ते की डोर। जो पति को किसी दूसरे के मुंह से शराबी शराबी सुन ले तो झगड़ जाती है। वर्ना आज के दौर में कोर्ट जा के पता चलता हैं। अनपढ़ गवार दो अक्षर जानने के बाद महिलाएं कैसे फैमिली कोर्ट में खुद को सुप्रीम कोर्ट के जज मन बैठी है,
Thursday, April 16, 2026
अच्छे लोग अच्छे की तलाश में
ब्याह दी गई अच्छी सुन्दर लड़कियों, शराबियों, सट्टेबाजों और नशाखोर से, अच्छे शरीफ लड़के ब्याहे गए चरित्रहीन मुकदमे बाजों से, हर अच्छा इंसान अच्छे की तलाश में ताउम्र भटकता रहा। दो समांतर रेखाओं की तरह।
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मुजरा करती महिलाएं
अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्त...