Tuesday, October 6, 2026

रेलगाड़ी आती है मजदुर भर ले जाती है पूरब से मालगाड़ी की तरह

पूरब से रेल रोज़ ठुश-ठुश कर निकलती है,
बंगाल से झारखंड, बिहार, यूपी होते हुए
महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब
को चली जाती है।

हर किसी को जल्दी है जाने की,
किसी को किसी के खेत में जाना है,
किसी को किसी के घर का चूल्हा-चौका करना है,
किसी को किसी का टॉयलेट साफ़ करना है,
किसी को किसी के गोदाम का माल लोड करना है,
किसी को किसी का हिसाब जोड़ना है।

हर आदमी रोज़गार की तलाश में निकल जाता है,
झुक-झुक करती आती है, उठा ले जाती है मजदूर पूरब से,
जैसे मालगाड़ी माल ले जाती है। भर-भर के।

भोगौलिक दृष्टिकोण दिशाओं की ओर

चाहे कोई देश हो या देश के राज्य,
एक अजीब पैटर्न देखने को मिलता है -
पूरब में पड़ने वाला हर क्षेत्र गरीब ही रह जाता है।

पश्चिमी देश, पूरब के देशों से अमीर हैं। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन सब पश्चिम में हैं और दुनिया पर राज करते हैं, जबकि पूरब के देश आज भी विकास के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

भारत में भी यही हाल है। भारत के पूरब के प्रदेश - बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, पूर्वांचल - पश्चिम के प्रदेशों - महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से बहुत ज्यादा गरीब हैं।

इतना ही नहीं, अगर आप किसी भी राज्य को उठा कर देख लें, तो उस राज्य का भी पूरबी हिस्सा सबसे गरीब मिलेगा। उत्तर प्रदेश में पश्चिमी यूपी अमीर है और पूर्वांचल गरीब। बिहार में भी पूरबी बिहार सबसे पिछड़ा है।

ऐसा क्यों?

क्योंकि विकास हमेशा समुद्र और राजधानी की तरफ भागता है। फैक्ट्री, पैसा, नौकरी, सड़क सब पश्चिम में बना, पूरब केवल मजदूर सप्लाई करने वाला क्षेत्र बना रहा।

Monday, October 5, 2026

रीलबाज़ जनरेशन और प्रोटेस्ट

रीलबाज़ जनरेशन और प्रोटेस्ट

मेट्रो स्टेशन के दीवारों, पिलरों के सामने खड़ा हो के सिगरेट फूंकते अश्लीलता फैलाते लड़के लड़कियां जेन-Z, समाज सुधारने चले हैं। नारे लगा रहे हैं। इनके नारों से पता चलता है, अश्लीलता, अश्लीलता अश्लील लोगों की निशानी होती है। ये लोग प्रदर्शन में भी अश्लीलता फैलाने से बाज नहीं आते।

गांव वाले सुखीराम

गाँव-देहात में सुखीराम बड़े-बड़े बातें करते,
हर गाँव में मिलेंगे,
सुखीराम कभी बाहर गये नहीं,
लेकिन उनको सब हर जगह के बारे में पता है, हर चीज को ऐसे बतायेंगे जैसे हर चीज को देखा हो,
किसी स्थान के निवासी को उसी के जगह के बारे में बताने लगेंगे,
ये लोग रोज सरकार बनाते हैं रोज गिराते हैं,
सरकार सही काम कर रही गलत सब पता है,
लेकिन गाँव से बाहर कभी गये ही नहीं।

Friday, September 25, 2026

गांव, गरीब, और सरकार

गाँव के लोगों का आधा समय फोटोकॉपी कराने में और बाकी समय सरकार की योजनाओं के चक्कर में निकल जाता है।

सरकार गाँव के लोगों को फुर्सत ही नहीं देती, आधार-पैन कार्ड की फोटोकॉपी की स्कीम खत्म भी नहीं होती कि राशन कार्ड, खसरा-खतौनी और वोटर कार्ड की नई स्कीम ले आती है।

गाँव का गरीब, गरीबी से ज़्यादा इन्हीं कागजों में उलझा हुआ है।

Author Vinod Kushwaha

रेलगाड़ी आती है मजदुर भर ले जाती है पूरब से मालगाड़ी की तरह

पूरब से रेल रोज़ ठुश-ठुश कर निकलती है, बंगाल से झारखंड, बिहार, यूपी होते हुए महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब को चली जाती है। हर किसी को ज...