Friday, September 25, 2026

गांव, गरीब, और सरकार

गाँव के लोगों का आधा समय फोटोकॉपी कराने में और बाकी समय सरकार की योजनाओं के चक्कर में निकल जाता है।

सरकार गाँव के लोगों को फुर्सत ही नहीं देती, आधार-पैन कार्ड की फोटोकॉपी की स्कीम खत्म भी नहीं होती कि राशन कार्ड, खसरा-खतौनी और वोटर कार्ड की नई स्कीम ले आती है।

गाँव का गरीब, गरीबी से ज़्यादा इन्हीं कागजों में उलझा हुआ है।

Author Vinod Kushwaha

Wednesday, September 23, 2026

प्रजातंत्र और प्रजा

इस देश में जब तक कोई पोल पर न चढ़े,
आग न लगाए, हत्या न करे, आत्महत्या न करे,
किसी अधिकारी-नेता की गाड़ी के आगे न आए,
तब तक गरीब की आवाज़ इस देश में कोई नहीं सुनता! 
शायद इसलिए गरीब को ऊपर जाकर या भेजकर बोलना पड़ता है।

Tuesday, September 8, 2026

खुशी त्यागी जा सकती है दुःख नहीं

खुशी त्यागी जा सकती है, दुख को त्यागना नामुमकिन है,
 रेगिस्तान ने त्याग दिया हरियाली को फिर वो कभी त्याग नहीं सके रेगिस्तान, बंजर जमीन,
रेगिस्तान कभी हरा-भरा नहीं बन पाया।
खुशी प्राप्त की जाती है इसलिए त्यागी जा सकती है
दुख स्वयं आता है इसलिए त्यागा नहीं जा सकता।

विरोध होना चाहिए

विरोध होना चाहिए सरकार हो, राजा हो, नौकरशाह हो
सबका विरोध होना चाहिए,
देश में हर दोगलेपन का विरोध होना चाहिए।

जिससे देश की अखंडता, प्रेम, जाती धर्म
सब बचा रहे।

विरोध समाज का अभिन्न अंग है।
विरोध न होना गुलाम हो जाने का प्रतीक है।

— Vinod Kushwaha —
Blog: चीखें मेरी कलमों की

जिम्मेदारियां हादसों से भी भरी होती है।

कोल्डड्रिंक समोसे के पैसे बचाकर
कॉपी किताब खरीदने वाले लड़के,
जीवन में कई हादसे लिए जीते हैं।
ये लड़के कभी बिगड़े नहीं, 
ये लड़के मौन हो गए उमर भर के लिए 

Sunday, September 6, 2026

आस्तित्व बचाने के लिए कठोरता एक विकल्प है।

पहाड़ों को देखा है, उनका ठहराव है सदियों से, नदियाँ पहाड़ों से निकल के दूर-दराज़ को जाती हैं, पहाड़ वहीं रहता है, पहाड़ अपाहिज है चल नहीं सकता, पहाड़ गूँगा है बोल नहीं सकता, पहाड़ बहरा है सुन नहीं सकता, पहाड़ इसलिए कठोर नहीं है कि उसे कठोरता पसंद है, पहाड़ कठोर इसलिए है कि पहाड़ की अपनी मजबूरियाँ हैं।

पहाड़ कठोर नहीं होता तो पहाड़ अस्तित्वहीन हो जाता, जिंदा रहने के लिए कई बार कठोर हो जाना पड़ता है।

Author - Vinod Kushwaha |

गांव, गरीब, और सरकार

गाँव के लोगों का आधा समय फोटोकॉपी कराने में और बाकी समय सरकार की योजनाओं के चक्कर में निकल जाता है। सरकार गाँव के लोगों को फुर्सत ही नहीं दे...