पहाड़ों को देखा है, उनका ठहराव है सदियों से, नदियाँ पहाड़ों से निकल के दूर-दराज़ को जाती हैं, पहाड़ वहीं रहता है, पहाड़ अपाहिज है चल नहीं सकता, पहाड़ गूँगा है बोल नहीं सकता, पहाड़ बहरा है सुन नहीं सकता, पहाड़ इसलिए कठोर नहीं है कि उसे कठोरता पसंद है, पहाड़ कठोर इसलिए है कि पहाड़ की अपनी मजबूरियाँ हैं।
पहाड़ कठोर नहीं होता तो पहाड़ अस्तित्वहीन हो जाता, जिंदा रहने के लिए कई बार कठोर हो जाना पड़ता है।
Author - Vinod Kushwaha |