Sunday, September 6, 2026

आस्तित्व बचाने के लिए कठोरता एक विकल्प है।

पहाड़ों को देखा है, उनका ठहराव है सदियों से, नदियाँ पहाड़ों से निकल के दूर-दराज़ को जाती हैं, पहाड़ वहीं रहता है, पहाड़ अपाहिज है चल नहीं सकता, पहाड़ गूँगा है बोल नहीं सकता, पहाड़ बहरा है सुन नहीं सकता, पहाड़ इसलिए कठोर नहीं है कि उसे कठोरता पसंद है, पहाड़ कठोर इसलिए है कि पहाड़ की अपनी मजबूरियाँ हैं।

पहाड़ कठोर नहीं होता तो पहाड़ अस्तित्वहीन हो जाता, जिंदा रहने के लिए कई बार कठोर हो जाना पड़ता है।

Author - Vinod Kushwaha |

Saturday, July 25, 2026

जेन Z या जेन Y

Gen Z रीलबाज है। ये हर बात पर रील बनाते है। इनके बस का प्रोटेस्ट नहीं है। इन्हें देख के ऐसा लगता है। ये अपने टाइम में रील से सरकार चलाएंगे। अभी का जो प्रोटेस्ट था वो Gen Y (Millennials) generation के लोगो ने संभाल रखा था। नहीं तो इनकी जो आदत है, पहली लाठी में ही पूरा मैदान खाली कर देते। ये तो Gen Y के लोगो के बल पे टिके हुवे थे। Gen Z से करियर के बारे में पूछोगे ये उसका भी रील बना देंगे। ये तो हेलो दोस्तो बोलने वाले लोगों से Hi friends बोलने पर मजबूर कर दे रहे है। ये जेन Z नहीं ये इंस्टाग्राम रील है। ये पूरी सरकार से रील बनवाएंगे। 

Saturday, April 4, 2026

नए दौर के मासूम लोग

बचा रखा है सभ्यताएं और संस्कार आज भी उन लड़कियों और महिलाओं ने जो आज के दौर में भी दिख जाती है। 36 इंच की साइकिल के करियर पे बैठ के जाती हुई, अपने पिता या पति के साथ। 

Tuesday, September 16, 2025

बचपन बच्चों जैसा होना चाहिए

बरसात के दिनों में क्लास में बच्चों को घर जा के बरामदे और बंगले में बैठ के पढ़ने की बातें सुनते हुए हमने घर जा के त्रिपाल को बांस के खंभों में फसा के उसके नीचे बैठ के ढिबरी के उजाले में राते बिताई है। 
हर उस सवाल का जवाब नहीं था। कि तुम कहा बैठ के पढ़ते हो बंगले में या बरामदे में ?। कुछ सवाल लंबे वक्त तक घर कर जाते हैं। वक्त बीतने के बाद भी।  

Sunday, August 3, 2025

उम्र बस एक नंबर

उम्र में उम्रदराज होना या किसी चीजों का ज्यादा दिन तक अनुभव होना, ये साबित नहीं करता कि, सामने वाला ज्यादा अनुभवी है। या जायदा समझदार है। उम्र एक समय मात्र है। इससे समझदारी की तुलना नहीं कर सकते। अनुभव, समझदारी तो इस बात पे निर्भर करती है कि, सामने वाला किसी चीज को किस गंभीरता से देखता है। सोचता है। समझता है। मानता हु कि उम्र ने बहुत अनुभव दिए होंगे। हो सकता है। वो सारा अनुभव किसी और मौसम का रहा हो। क्लास में एक बच्चा लगातार ३ वर्षों से असफल होता रहता है। उसी क्लास में एक नया बच्चा पहली साल में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर लेता है। और असफल हुआ बच्चा फिर असफल हो जाता है। कुछ चीजें आदमी जन्म से ले के पैदा होता है। जो खुद सीखता है। किसी के सिखाने से जायदा सीखता है। वो उस चीज से ही नहीं सीखता जिससे उसकी जरूरत हो। या समाज ने बताया हो। बल्कि वो हर उस चीज से सीखता है। जो उसके सामने दिखता है। वो सीखता है। एक एक बूंद बूंद से जो प्रकृति में व्याप्त है। जिसने हर सामने पड़ी चीजों को जाना है। उससे सीखा है जो भी नजर आई। उस आदमी का जीवन का ५ सालों का अनुभव किसी ऐसे ४० साल के अनुभवी से जायदा है। जिसने एक रस्ते पे चला है बस एक चीज को ही देखते। समय के साथ मौसम बदल जाता है। उम्रदराज हो के आप गलत को सही नहीं बना सकते। क्या पता आपका अनुभव बरसात का रहा हो। और मौसम बदल गया हो। बात जाड़े की बात हो रही हो। समय के साथ चीजें बदल जाती है। पुराने कारीगर नई मशीनें नहीं बना पाते। उमर देता है अनुभव लेकिन एक उमर तक ही। 

Sunday, July 27, 2025

त्रासदी

जीवन के हर त्रासदी के बाद आदमी के हिस्से में इतना जरूर आना चाहिए, राशन, मिटी, पानी और प्यार जिसके सहारे वो जी सके बाकी बची उम्र। 

आस्तित्व बचाने के लिए कठोरता एक विकल्प है।

पहाड़ों को देखा है, उनका ठहराव है सदियों से, नदियाँ पहाड़ों से निकल के दूर-दराज़ को जाती हैं, पहाड़ वहीं रहता है, पहाड़ अपाहिज है चल नहीं सक...