रेगिस्तान ने त्याग दिया हरियाली को फिर वो कभी त्याग नहीं सके रेगिस्तान, बंजर जमीन,
रेगिस्तान कभी हरा-भरा नहीं बन पाया।
खुशी प्राप्त की जाती है इसलिए त्यागी जा सकती है
दुख स्वयं आता है इसलिए त्यागा नहीं जा सकता।
मेरी सोच मेरी कलम से, कहानी, पोएम, नोवेल, एहसास और कलम, हिंदी साहित्य
खुशी त्यागी जा सकती है, दुख को त्यागना नामुमकिन है, रेगिस्तान ने त्याग दिया हरियाली को फिर वो कभी त्याग नहीं सके रेगिस्तान, बंजर जमीन, रेग...