Tuesday, September 16, 2025

बचपन बच्चों जैसा होना चाहिए

बरसात के दिनों में क्लास में बच्चों को घर जा के बरामदे और बंगले में बैठ के पढ़ने की बातें सुनते हुए हमने घर जा के त्रिपाल को बांस के खंभों में फसा के उसके नीचे बैठ के ढिबरी के उजाले में राते बिताई है। 
हर उस सवाल का जवाब नहीं था। कि तुम कहा बैठ के पढ़ते हो बंगले में या बरामदे में ?। कुछ सवाल लंबे वक्त तक घर कर जाते हैं। वक्त बीतने के बाद भी।  

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