Wednesday, April 29, 2020

रातों पे चुनिंदे शायरी

रात को रात हो के जाना था
ख़्वाब को ख़्वाब हो के देखते हैं
""""''''''''"""""""""""'
रेत पर रात ज़िंदगी लिक्खी
सुब्ह आ कर मिटा गईं लहरें
""''''""""'''"""""''''''''''''
ऐ रात मुझे माँ की तरह गोद में ले ले 
दिन भर की मशक़्क़त से बदन टूट रहा है 
''''''''''''''''''''''"'''''''''''''''''''
ये तन्हा रात ये गहरी फ़ज़ाएँ 
उसे ढूँडें कि उस को भूल जाएँ 

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