कैद हैं इन्सान पंछियों की तरह अब जी कहा रहें हैं
हम इन्सान हों के इन्सानों की तरह
हम इन्सान हों के इन्सानों की तरह
अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्त...
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