तुम्हे आरजू है चाहत की और, मेरे दिल में प्यार का समंदर है,
पर चाहता हूं तुम्हें थोड़ा-थोड़ा, क्योंकि तेरे बह जाने का डर है।
पर चाहता हूं तुम्हें थोड़ा-थोड़ा, क्योंकि तेरे बह जाने का डर है।
अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्त...
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