Friday, September 25, 2020

तेरे जाने के बाद

चांदनी रात ना आई तब से
रात है पांव जमाई तब से
इक हंसी को भी तरसे हैं हम
तेरे जाने के बाद
चलते तो रहे पर पहुंचे ना कहीं
सांस रुक-रुक के यूंही चलती रही
ज़िन्दगी थम सी गई है तब से
तेरे जाने के बाद
कुछ हम तनहा कुछ तुम तनहा
लबों पे लफ्ज़ ना आया तब से
तेरे जाने के बाद
कहें तो किससे कहें हम अपने दिल की सदा
सभी ग़मगीन बैठें है यहां
तेरे जाने के बाद
कभी आंखों को बंद करके
ग़म-ए-दिल की भी सुनता हूं
मेरे आंसू भी रूठे हैं मुझसे
तेरे जाने के बाद
जिए जाता हूँ इस धुन में
कभी तू लौट के आए
उम्मीदें भी जुड़ा मुझसे तेरे जाने के बाद

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