Monday, November 30, 2020

क्या देखते हो इतनी शिद्दत से

क्या देखते हो इतनी शिद्दत से, आसमां में तुम?
तारे तोड़ कर लाओगे?.
अरे बीमार हो; परवरदिगार से सेहत मांगों,
वरना, देखते ही रह जाओगे।

क्यों हो इतने क्लेशित,उद्वेलित,आक्रोशित तुम?
आसमां सिर पर उठाओगे ?
उठो ,लड़ो, दो मात इस अभिशप्त बीमारी को,
वरना,कुछ भी नहीं कर पाओगे।

क्यों आकुल हो, राह की रुकावट को देख के तुम ?
मामूली कंकड़ है ,कोई अडिग पहाड़ नहीं।
बहुत जान बाकी बची है अभी तुम में,
क्या हुआ जो हुंकार में अब शेर की दहाड़ नहीं।

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