गाँव के लोगों का आधा समय फोटोकॉपी कराने में और बाकी समय सरकार की योजनाओं के चक्कर में निकल जाता है।
सरकार गाँव के लोगों को फुर्सत ही नहीं देती, आधार-पैन कार्ड की फोटोकॉपी की स्कीम खत्म भी नहीं होती कि राशन कार्ड, खसरा-खतौनी और वोटर कार्ड की नई स्कीम ले आती है।
गाँव का गरीब, गरीबी से ज़्यादा इन्हीं कागजों में उलझा हुआ है।
Author Vinod Kushwaha
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