विरोध होना चाहिए सरकार हो, राजा हो, नौकरशाह हो
सबका विरोध होना चाहिए,
देश में हर दोगलेपन का विरोध होना चाहिए।
जिससे देश की अखंडता, प्रेम, जाती धर्म
सब बचा रहे।
विरोध समाज का अभिन्न अंग है।
विरोध न होना गुलाम हो जाने का प्रतीक है।
— Vinod Kushwaha —
Blog: चीखें मेरी कलमों की