Tuesday, July 13, 2021

वक़्त के तेज गुजरते लम्हों में

अक्सर जीवन कभी 
इतनी तेज़ गति से 
गुज़रता है 
तब वह कुछ अहसास करने का
और समझने का  
समय नहीं 
देता पर जब कभी-कभी
जीवन इस कदर 
ठहर जाता है 
तब कुछ अहसास होने ही नहीं देता
तब ऐसा लगता है 
जैसे हमारे अंदर 
एक महाशून्य उभरता 
जा रहा है
शायद इसी मनोदशा में 
महसूस होती है 
बेहद थकान 
और हो जाती है शिथिल 
सी ज़िंदगी 
तब वक़्त के तेज गुजरते 
लम्हों में कई बार मन 
कहता है 
सुबह होती है शाम होती है 
उम्र यूं ही तमाम होती है !!

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