कभी-कभी जब हम भीतर से बहुत भरे हुए होते हैं
तो सभी कुछ कितना उदास सा लगता है ना,
कभी-कभी कितनी ताकत चाहिए होती है
आईने के सामने खड़े होकर खुद से नज़रें मिलाने में,
कभी-कभी कितना मुश्किल होता है
मां के हाल पूछने पर
सिर्फ इतना कहना की... ठीक हूँ माँ।
अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्त...
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