कभी-कभी जब हम भीतर से बहुत भरे हुए होते हैं
तो सभी कुछ कितना उदास सा लगता है ना,
कभी-कभी कितनी ताकत चाहिए होती है
आईने के सामने खड़े होकर खुद से नज़रें मिलाने में,
कभी-कभी कितना मुश्किल होता है
मां के हाल पूछने पर
सिर्फ इतना कहना की... ठीक हूँ माँ।
हाइड्रा, सीलेंट्रेटा का सदस्य है! या फिर उसने भी बीजेपी जॉइन कर लिया ?
No comments:
Post a Comment