Sunday, March 14, 2021

वो बिछड़ते वक़्त होठों से हँसी लेता गया

वो बिछड़ते वक़्त होठों से हँसी लेता गया
मुझमें साँसें छोड़ दीं, बस ज़िन्दगी लेता गया

वो भी होठों पर लिये आया था दरिया अब की बार
मैं भी मिलते वक़्त सारी तिश्नगी लेता गया

धूप का अहसास यूँ रहता है मेरी रूह में
एक साया जैसे सारी छाँव ही लेता गया

चाँद और फिर चाँद पूनम का किसे उम्मीद थी
रौशनी देने के बदले रौशनी लेता गया

एक गहरा घाव जैसे तोड़ दे राही का दम
मेरा माज़ी आने वाली ज़िन्दगी लेता गया

No comments:

Post a Comment

मुजरा करती महिलाएं

अगर भगवान रिश्ते नहीं बनाते तो पढ़ी लिखी, सुन्दर, सुशील लड़कियां, शराबी, दारूबाज, आवरों के हिस्से में नहीं आती, जो हर दिन गली खा के भी रिश्त...