Tuesday, September 8, 2026
खुशी त्यागी जा सकती है दुःख नहीं
विरोध होना चाहिए
जिम्मेदारियां हादसों से भी भरी होती है।
Sunday, September 6, 2026
आस्तित्व बचाने के लिए कठोरता एक विकल्प है।
Saturday, July 25, 2026
जेन Z या जेन Y
Saturday, April 4, 2026
नए दौर के मासूम लोग
बचा रखा है सभ्यताएं और संस्कार आज भी उन लड़कियों और महिलाओं ने जो आज के दौर में भी दिख जाती है। 36 इंच की साइकिल के करियर पे बैठ के जाती हुई, अपने पिता या पति के साथ।
Tuesday, September 16, 2025
बचपन बच्चों जैसा होना चाहिए
Sunday, August 3, 2025
उम्र बस एक नंबर
Sunday, July 27, 2025
त्रासदी
जीवन के हर त्रासदी के बाद आदमी के हिस्से में इतना जरूर आना चाहिए, राशन, मिटी, पानी और प्यार जिसके सहारे वो जी सके बाकी बची उम्र।
Saturday, April 12, 2025
पूर्वांचल एक्सप्रेस
Thursday, April 10, 2025
पूर्वांचल एक्सप्रेस (नॉवेल)
Thursday, April 3, 2025
पूर्वांचल एक्स्प्रेस नोबेल
Saturday, November 30, 2024
उम्र और हम वहां से यहां तक
Tuesday, November 5, 2024
समाज से बिछड़े हुए लोगों
Monday, September 30, 2024
अनसुलझे लड़के
Friday, March 15, 2024
सरकारी टोटके और सरकार की जनता
हकीकत तो यही बता रहीं है। आज भी इस देश के एक तिहाई लोग की औकात क्या है। आजादी से अब तक। मैं भी उन हिस्सा का एक पार्ट हु। और गौर से कह सकता हु। की ५ किलो अनाज और ऐसे योजनाएं एक ऐसी दवा है की न बीमारी को ठीक कर सकती है । न दूसरी दवा लेने देगी। पूरा गांव का परिवार जो राशन कार्ड और ५ किलो अनाज की सेवाएं लेते आया है। ओ आज भी इन्ही चीजों में उलझा है। और शिक्षा से वंचित रह गया है। स्कूल भेजने से ज्यादा सरकारी लाभ पाने पे जोड़ दिया जाता रहा है। आधार, पैन कार्ड और फोटो कॉपी से न जाने कब बाहर निकलेगा एक अहम हिस्सा इस देश का। इसका कोई आंकड़ा ही नही है। खैर ५ किलो अनाज को हम ऐसे ही देख रहे है। बाबा की भाबुत की तरह जो बीमारी के लिए बाट रहे लेकिन उससे न बीमारी ठीक हो रही न लोगो का बाबा के प्रति और भाबूत के प्रति विश्वास कम हो रहा। खैर लिखते हुवे भी हम दो हिसो में बट गए हैं। न बाबा के खिलाप लिख पा रहे है न बाबा के तारीफ़ में क्यों की हम भी उसी हिस्से का एक पार्ट जो है। सच बताऊं तो कोई किसी का लहर नही था चुनाव में। बस २००० रूपया और ५ किलो अनाज की लहर थी जो अब तक है।
Wednesday, February 14, 2024
ख्वाहिशों की अंतिम तिथि
Tuesday, November 28, 2023
रूढ़िवादी विचारधारा और महिला सशक्तिकरण
Friday, October 13, 2023
अस्तित्व
Friday, September 29, 2023
अतीत जज़्बात आज और हम
खुशी त्यागी जा सकती है दुःख नहीं
खुशी त्यागी जा सकती है, दुख को त्यागना नामुमकिन है, रेगिस्तान ने त्याग दिया हरियाली को फिर वो कभी त्याग नहीं सके रेगिस्तान, बंजर जमीन, रेग...
-
बचा रखा है सभ्यताएं और संस्कार आज भी उन लड़कियों और महिलाओं ने जो आज के दौर में भी दिख जाती है। 36 इंच की साइकिल के करियर पे बैठ के जाती हुई...
-
हम मानते हैं इक पिढी बाद बहुत कुछ बदल जाता है हम जब बड़े हो जाते हैं तो हम अपने मर्जी से जिना चाहते हैं नहीं चाहते कोई रोक टोक करें यहां तक ...
-
एक लंबे टाइम के संघर्ष से गुजर जाने के बाद अपनी इच्छाओं को मार के जीने के बाद। एक अवस्था ऐसी आ जाती। की खुशी मिल जाने का भी कोई अर्थ नही रह ...
-
जीवन के हर त्रासदी के बाद आदमी के हिस्से में इतना जरूर आना चाहिए, राशन, मिटी, पानी और प्यार जिसके सहारे वो जी सके बाकी बची उम्र।
-
एक वक्त था। कुछ लोग थे। कुछ शौक था। कुछ सपने थे। कुछ दोस्त थे। सब अपने थे. कुछ कहते हैं। कुछ सुनते थे। लबो पे हंसी थी। गम बहुत कम था। अब न व...
-
बोलोगे तो मारे जाओगे हा में हा नही मिलेगी तो मारे जाओगे उनके रंग में ही रंगना होगा। दूसरा रंग अपनाओगे तो मारे जाओगे हक मांगोगे तो कटघरे में...
-
इस तूफ़ान से गुज़रते हुए, बदल रही हैं चीजें । सीख जाओगे एक रोज़ तूफ़ानों में भी शांत रहना। कई लकीरें उभर आयेंगी चेहरे पर, और उन लकीरों में क...
-
भूत की स्मृतियाँ वर्तमान का संघर्ष और बच्चों में भविष्य । पिता की उँगली पकड़ कर चलना सीखते बच्चे एक दिन इतने बड़े हो जाते हैं कि भूल जाते है...